
बिलासपुर : आरोपी को अदालत से दोषमुक्त करने के बाद भी उसकी जब्त संपत्ति को शासन के पक्ष में राजसात करना कानून के अनुरूप नहीं है। सत्र न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि जब तक आरोपी दोषसिद्ध नहीं हो जाता, तब तक छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम के तहत जब्त उपकरणों को शासन के पक्ष में राजसात नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें डीजे संचालक को दोषमुक्त करने के बावजूद उसका पूरा डीजे साउंड सिस्टम राजसात करने का फैसला सुनाया गया था। अदालत ने आवश्यक औपचारिकताओं और स्वामित्व की पुष्टि के बाद जब्त डीजे सेटअप वास्तविक स्वामी को लौटाने का आदेश दिया है।
शादी समारोह में तेज आवाज में डीजे बजाने पर हुई थी कार्रवाई
मामला 17 मार्च 2026 की रात का है। केबिनपारा ग्राम बेलगहना में शादी समारोह के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने की शिकायत पुलिस को मिली थी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए डीजे वाहन क्रमांक सीजी 11 एडी 0570 सहित साउंड सिस्टम के उपकरण जब्त कर लिए। पुलिस ने मौके से 14 नग स्पीकर, 3 एम्प्लीफायर, 2 जनरेटर, 10 सारफी लाइट, 8 पार लाइट समेत अन्य उपकरणों की जब्ती बनाई थी। इसके बाद डीजे संचालक श्यामलाल यादव के खिलाफ छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 की धारा 4, 10 एवं 15 के तहत अपराध दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया गया।
दोषमुक्ति के बाद भी राजसात कर दिया पूरा डीजे सेटअप
मामले की सुनवाई करते हुए कोटा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने 3 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने श्यामलाल यादव को कोलाहल अधिनियम के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। हालांकि, इसी फैसले में जब्त डीजे साउंड सिस्टम को शासन के पक्ष में राजसात करने का आदेश भी जारी कर दिया गया। यानी जिस मामले में आरोपी को अपराध से बरी कर दिया गया, उसी मामले में उसकी जब्त संपत्ति शासन के पक्ष में करने का फैसला सुना दिया गया। इस आदेश को चुनौती देते हुए आरोपी ने अधिवक्ता विनय मिश्रा के माध्यम से सत्र न्यायालय में दाण्डिक अपील प्रस्तुत की।
धारा 17 में दोषसिद्धि के बाद ही राजसात का प्रावधान
अपील की सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय ने छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम की धारा 17 के प्रावधानों पर विचार किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब्त उपकरणों को राजसात करने की शक्ति तभी लागू हो सकती है, जब आरोपी को संबंधित अपराध में दोषसिद्ध ठहराया गया हो। जब विचारण न्यायालय आरोपी को मूल अपराध से दोषमुक्त कर चुका है, तब उसकी संपत्ति को शासन के पक्ष में राजसात करने का आदेश कानून के अनुरूप नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने माना कि दोषमुक्ति के बावजूद संपत्ति राजसात करना अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।
जब्ती और राजसात अलग-अलग प्रक्रिया
सत्र न्यायालय ने अपने फैसले में एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर भी स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि किसी संपत्ति को जब्त करना और उसे शासन के पक्ष में राजसात करना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अधिनियम की धारा 16 के तहत जब्ती का अधिकार होने मात्र से धारा 17 के अंतर्गत राजसात करने का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता। विशेष रूप से तब, जब संबंधित आरोपी को न्यायालय से दोषमुक्त कर दिया गया हो। अदालत ने इसी कानूनी आधार पर निचली अदालत के राजसात संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया।
अपील स्वीकार, डीजे संचालक को मिलेगी राहत
सत्र न्यायालय ने श्यामलाल यादव की अपील स्वीकार करते हुए जब्त डीजे सेटअप को आवश्यक औपचारिकताओं और स्वामित्व की पुष्टि के बाद उसके वास्तविक स्वामी को लौटाने का आदेश दिया है। इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि किसी मामले में उपकरण जब्त किए जाने के बाद भी उन्हें शासन के पक्ष में राजसात करने के लिए कानून में निर्धारित शर्तो का पालन करना जरूरी है। केवल जब्ती के आधार पर संपत्ति पर शासन का अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता।