
नई दिल्ली। देश की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत देते हुए मई 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में जीएसटी संग्रह में वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञ इसे बढ़ती खपत, मजबूत व्यापारिक गतिविधियों और आयात से प्राप्त कर राजस्व में बढ़ोतरी का परिणाम मान रहे हैं।
मई के दौरान केंद्रीय जीएसटी (CGST), राज्य जीएसटी (SGST) और एकीकृत जीएसटी (IGST) से सरकार को उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त हुआ। आंकड़े बताते हैं कि घरेलू स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की मांग मजबूत बनी हुई है, जिसका सीधा असर कर संग्रह पर दिखाई दिया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कर योग्य वस्तुओं की आपूर्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि सेवा क्षेत्र में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि उपभोक्ता खर्च और आर्थिक गतिविधियां लगातार गति पकड़ रही हैं।
आयात से मिला बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आयात पर मिलने वाले IGST कलेक्शन ने राजस्व वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयात से जुड़े कर संग्रह में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे कुल GST राजस्व को मजबूती मिली।
GST सुधारों की जरूरत पर जोर
कर विशेषज्ञों का कहना है कि GST प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुधारों की आवश्यकता है। विशेष रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट, रिफंड प्रक्रिया और पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे में लाने जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हो सकती है। आगामी GST परिषद की बैठक में इन विषयों पर अहम निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अप्रैल के रिकॉर्ड के बाद मई में भी मजबूत प्रदर्शन
गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में GST संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। मई में संग्रह थोड़ा कम रहने के बावजूद 1.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आंकड़ा देश की अर्थव्यवस्था में जारी मजबूती और कर अनुपालन में सुधार का संकेत माना जा रहा है।