बिलासपुर. शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्मृति वाटिका के पीछे स्थित कोपरा जलाशय के संरक्षण को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। कुछ महीने पूर्व ही केंद्र सरकार द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व का मानते हुए रामसर साइट का दर्जा दिया गया था। लेकिन अब इस वेटलैंड के सामने प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनकर खड़ा हो गया है। जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा कोल वाशरियां संचालित हो रही हैं। इन वाशरियों से निकलने वाला गंदा पानी और अपशिष्ट जलाशय तक पहुंचने की आशंका ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी को देखते हुए अब दिल्ली से वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम बिलासपुर आकर हालात का जायजा लेगी।

कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी समिति

इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। वन मंडल बिलासपुर के डीएफओ नीरज कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कोपरा जलाशय के आसपास चल रही कोल वाशरियों को लेकर शुरुआती सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। इस विषय पर निगरानी रखने के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया गया है। अब विभाग को दिल्ली से आने वाली वैज्ञानिकों की टीम का इंतजार है। यह टीम मौके पर जाकर पूरे इलाके का विस्तृत मुआयना करेगी और अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।

रिपोर्ट के आधार पर वाशरियों पर होगा फैसला

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, दिल्ली के वैज्ञानिकों की टीम जो जांच रिपोर्ट तैयार करेगी, उसी के आधार पर आगामी कार्रवाई तय की जाएगी। रिपोर्ट में इस बात का आकलन किया जाएगा कि वाशरियों के कारण जलाशय की आबोहवा को कितना नुकसान हो रहा है। इसी के बाद यह निर्णय लिया जाएगा कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए इन कोल वाशरियों को वहां से हटाया जाए या फिर कोई अन्य संरक्षणात्मक व्यवस्था लागू की जाए।

180 प्रजातियों के पक्षियों का सुरक्षित घर

210 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला कोपरा जलाशय जैव विविधता के मामले में काफी समृद्ध है। अलग-अलग समय पर हुए सर्वे में यहां करीब 150 से लेकर 180 प्रजातियों के पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें से कई पक्षी दुर्लभ और संकटग्रस्त श्रेणी में आते हैं। हर साल सर्दियों के मौसम में साइबेरिया, यूरोप और एशिया के अलग-अलग देशों से हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी अपना डेरा डालने यहां पहुंचते हैं। यहां की भौगोलिक बनावट, पानी में मछलियों की पर्याप्त उपलब्धता और आसपास की प्राकृतिक वनस्पति इन पक्षियों के लिए एक सुरक्षित आवास का निर्माण करती है।

रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद इस इलाके को प्रदूषण मुक्त रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। कैचमेंट एरिया में औद्योगिक गतिविधियों के चलते पानी की गुणवत्ता खराब होने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में वैज्ञानिकों की यह जांच कोपरा जलाशय के प्राकृतिक स्वरूप को बचाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।