श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक नए सुरक्षा इनपुट को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। एजेंसियों का दावा है कि सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क अब अपने तौर-तरीकों में बदलाव कर नए माध्यमों के जरिए प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, हालिया जांच और पूछताछ के दौरान कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे यह आशंका जताई जा रही है कि आतंकी समर्थक तत्व अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए अलग-अलग सामाजिक और सार्वजनिक मंचों का इस्तेमाल करने का प्रयास कर सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस पहलू की गहन जांच कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद विरोधी अभियानों के चलते कई नेटवर्क कमजोर हुए हैं। ऐसे में कथित तौर पर कुछ समूह नए तरीके अपनाकर अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के खिलाफ कोई सामान्य निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता और जांच तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है।

सुरक्षा एजेंसियों का फोकस उन नेटवर्क्स, फंडिंग चैनलों और संपर्क सूत्रों पर है, जिनका इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इसके लिए विभिन्न एजेंसियां मिलकर सूचनाओं का विश्लेषण कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या नेटवर्क के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में केवल पारंपरिक खतरों ही नहीं, बल्कि छिपे हुए नेटवर्क और प्रभाव संचालन (Influence Operations) जैसे पहलुओं पर भी नजर रखना जरूरी हो गया है।