
रायपुर: रायपुर जिले के खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 बच्चों और किशोरों के रेस्क्यू के करीब छह महीने बाद भी मामला चर्चा में बना हुआ है। महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में बच्चों को फैक्ट्री से मुक्त कराया गया था, लेकिन अब तक फैक्ट्री संचालक के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हो सकी है। इस देरी को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं।
रेस्क्यू अभियान के दौरान दिल्ली मानवाधिकार आयोग, महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री में छापा मारा था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार वहां काम कर रहे कई बच्चे विभिन्न राज्यों से लाए गए थे। काउंसलिंग के दौरान कुछ बच्चों ने लंबे समय तक फैक्ट्री में रहने, अत्यधिक काम कराने और प्रतिकूल परिस्थितियों में रखे जाने जैसी बातें बताई थीं। अधिकारियों का दावा है कि कुछ बच्चों को पहले भी इसी संस्थान से मुक्त कराया जा चुका था।
हालांकि पुलिस का पक्ष इससे अलग है। खरोरा थाना पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान अधिकांश लोग बालिग पाए गए और उपलब्ध दस्तावेजों व तथ्यों के आधार पर किसी आपराधिक कृत्य की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच की गई थी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाई गई है। इसी वजह से अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
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