World Lung Cancer Day: हर साल 1 अगस्त को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य फेफड़ों के कैंसर और श्वसन संबंधी बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करना है। अचानक सांस फूलना (Shortness of Breath) एक ऐसा लक्षण है जिसे अक्सर लोग सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यह फेफड़ों या दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। भारत में हृदय रोग और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि सांस फूलने के पीछे कारण फेफड़ों की समस्या है या दिल की।  

फेफड़ों की बीमारी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण
डॉ. के अनुसार, दिल और फेफड़े शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम मिलकर करते हैं। यदि फेफड़ों में किसी तरह की समस्या होती है, तो सबसे पहले सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है। अस्थमा, निमोनिया, सीओपीडी (COPD) या फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में थक्का (Pulmonary Embolism) जैसी स्थितियों में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं

  • घरघराहट (Wheezing): सांस लेते या छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज आना।
  • लगातार खांसी: कफ या बलगम के साथ लंबे समय तक खांसी रहना।
  • सीने में जकड़न: ऐसा महसूस होना कि फेफड़े पूरी तरह खुल नहीं रहे।
  • खांसी में खून आना: ताजा खून या खून मिला बलगम निकलना।
  • गहरी सांस लेने पर दर्द: सांस लेने के दौरान छाती में तेज दर्द महसूस होना।

दिल की बीमारी होने पर ये संकेत मिल सकते हैं
यदि सांस फूलने की वजह दिल से जुड़ी समस्या है, जैसे हार्ट फेलियर, हार्ट अटैक या हृदय के वाल्व की बीमारी, तो मरीज में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं

  • लेटते ही सांस फूलना (Orthopnea): पीठ के बल लेटने पर सांस लेने में अधिक परेशानी, जबकि बैठने पर राहत मिलना।
  • पैरों और टखनों में सूजन: शरीर में पानी जमा होने के कारण सूजन आना।
  • सीने में दबाव या भारीपन: छाती के बीचों-बीच दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना।
  • दर्द का फैलना (Referred Pain): दर्द का गर्दन, जबड़े, कंधे, पीठ या बांह तक पहुंचना।

कब लें तुरंत मेडिकल मदद?
यदि सांस फूलने के साथ इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करें

  • सीने में तेज दर्द
  • अत्यधिक पसीना आना
  • होंठ या नाखून नीले पड़ना
  • चक्कर आना या बेहोशी
  • आराम करने के बाद भी सांस लेने में कठिनाई

सही कारण कैसे पता चलता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल लक्षणों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि परेशानी दिल की है या फेफड़ों की। कई बार दोनों अंगों की बीमारी के लक्षण एक जैसे होते हैं और कुछ मामलों में दोनों साथ भी प्रभावित हो सकते हैं। सटीक कारण जानने के लिए डॉक्टर मरीज की जांच के साथ जरूरत पड़ने पर ये टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं

  • ईसीजी (ECG)
  • छाती का एक्स-रे
  • सीटी स्कैन (CT Scan)
  • इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography)
  • स्पाइरोमेट्री (Spirometry)
  • रक्त जांच (Blood Tests)

डॉक्टर की सलाह
अचानक या बार-बार सांस फूलने की समस्या को कभी भी सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। यदि सांस लेने में परेशानी लगातार बनी रहे या उसके साथ सीने में दर्द, सूजन या खांसी में खून जैसे लक्षण हों, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।